मेरे अहसास

Ahsaas

Ahsaas
Dil ki baatain

Wednesday, 27 June 2012


कबूल नहीं 
आजादी में बेड़ियाँ 
लड़ी बहुत 

झांसी की रानी 
देश की खातिर ही 
हुई कुर्बान

कूदी मैदान 
ना पहनी चूड़ियाँ 
लड़ी जोश में 

लड़ी मर्दानी 
ले बर्छी तलवार 
आखिरी दम 

बहाया लहू 
वार्ता की मिसाल 
ऊँचा है नाम 

उसने किया 
न्योछावर जीवन
देकर प्राण 

बाँध पीठ वो 
मासूम को अपनी 
कूदी मैदान 

दगा दे गए 
अपने ही घर में 
जीतती कैसे 

लड़ी बहुत 
मतवाली थी मनु 
फ़िदा देश पे 

शान देश की 
मन में है सबके 
आज भी जिन्दा 

लक्ष्मी सरीखी 
देश का मान बढे 
पूजो कन्या को 













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