मेरे अहसास
Ahsaas
Dil ki baatain
Saturday, 4 August 2012
सखी री तुझे
क्यूँ लगा प्रेम रोग
ये बड़ा बुरा
दिल का रोग
बावरी क्यूँ हुई तू
करे बेहाल
खो बैठेगी तू
सुध बुध अपनी
हुई बीमार
देख रही है
सपन सलोने से
मन प्रसन्न
ख्यालों में गुम
नयी नयी प्रीत है
देखे दर्पण
मीत से बंधी
प्रीत की डोर अब
मुस्काते पल
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment