कबूल नहीं
आजादी में बेड़ियाँ
लड़ी बहुत
झांसी की रानी
देश की खातिर ही
हुई कुर्बान
देश की खातिर ही
हुई कुर्बान
कूदी मैदान
ना पहनी चूड़ियाँ
लड़ी जोश में
लड़ी मर्दानी
ले बर्छी तलवार
आखिरी दम
बहाया लहू
वार्ता की मिसाल
ऊँचा है नाम
उसने किया
न्योछावर जीवन
देकर प्राण
बाँध पीठ वो
मासूम को अपनी
कूदी मैदान
दगा दे गए
अपने ही घर में
जीतती कैसे
लड़ी बहुत
मतवाली थी मनु
फ़िदा देश पे
शान देश की
मन में है सबके
आज भी जिन्दा
लक्ष्मी सरीखी
देश का मान बढे
पूजो कन्या को

खूबसूरत रचना ..
ReplyDeleteaabhaar aapka
ReplyDeleteamazing photo and your ahsas
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