Ahsaas
Dil ki baatain
Sunday, 23 September 2012
Wednesday, 27 June 2012
कबूल नहीं
आजादी में बेड़ियाँ
लड़ी बहुत
झांसी की रानी
देश की खातिर ही
हुई कुर्बान
देश की खातिर ही
हुई कुर्बान
कूदी मैदान
ना पहनी चूड़ियाँ
लड़ी जोश में
लड़ी मर्दानी
ले बर्छी तलवार
आखिरी दम
बहाया लहू
वार्ता की मिसाल
ऊँचा है नाम
उसने किया
न्योछावर जीवन
देकर प्राण
बाँध पीठ वो
मासूम को अपनी
कूदी मैदान
दगा दे गए
अपने ही घर में
जीतती कैसे
लड़ी बहुत
मतवाली थी मनु
फ़िदा देश पे
शान देश की
मन में है सबके
आज भी जिन्दा
लक्ष्मी सरीखी
देश का मान बढे
पूजो कन्या को
Friday, 22 June 2012
मित्रों जिनकी आँखें नहीं होती अगर उनका कोई अपना उनकी आँखों की रौशनी बन जाए तो कितना अच्छा हो जाए ये अंधियारा जीवनमें भी उजाला हो जाए ...प्रभु सबकी दुनिया में उजाला रखे सबको आबाद रखे यही कामना है ...शुभरात्रि मित्रों .....
रोशन आँखें
देखो दुनियाँ प्यारी
कितनी सुंदर
जगमगाती
रंगबिरंगी प्यारी
सतरंगी सी
मजबूर हूँ
अंधियारा जीवन
प्रभु सुन ले
भोर की बेला
बिन अखियाँ के मैं
देख ना पाऊं
खूबसूरत
निशा निहारूं कैसे
तड़पे मन
पाया तुझको
तेरी अखियन से
देखूं दुनियाँ
उजाला बना
जिन्दगी में खुशियाँ
लाया बहार
जीवन साथी
ऐसे ही देना प्रभु
सातों जनम ................
रोशन आँखें
देखो दुनियाँ प्यारी
कितनी सुंदर
जगमगाती
रंगबिरंगी प्यारी
सतरंगी सी
मजबूर हूँ
अंधियारा जीवन
प्रभु सुन ले
भोर की बेला
बिन अखियाँ के मैं
देख ना पाऊं
खूबसूरत
निशा निहारूं कैसे
तड़पे मन
पाया तुझको
तेरी अखियन से
देखूं दुनियाँ
उजाला बना
जिन्दगी में खुशियाँ
लाया बहार
जीवन साथी
ऐसे ही देना प्रभु
सातों जनम ................
Saturday, 26 May 2012
तुम्हारे मेरे बीच क्यूँ ये दूरियां बढ़ रही ,बताओ ?
ये शब्दों का झुरमुट बढाता फासला क्यूँ है ?
शब्दों की इस भीड़ में तुम मौन !! मैं क्या समझूँ ?
अपनों की इस भीड़ में बेगाने से तुम !! बेगाना कौन ?
मैं तुम्हें ,तुम्हारे इस रूप को क्या नाम दूँ ?
तुम्हारे मेरे बीच अब जब कैसी भी दीवार नहीं
फिर भी तुम्हारी बेरुखी !! मैं क्या समझूँ ?
भावनाओं का मायाजाल ,छलावा कुछ पलों का ,या मजबूरी नाम दे दूँ !!
तुम्हारा ये मौन, तुम्हारी ये चुप्पी ,तुम कुछ कहते क्यूँ नहीं?
किन्तु ये बहुत कुछ कह जाती है
जैसे टूट कर तारा गिरता है जमीं पर वैसे ही
मैं भी टूट कर बिखरने को मजबूर
बचा सकते हो तो थाम लो आकर
कह दो तुम मेरे हो सदा के लिए
तुम्हारा प्यार छलावा नहीं मेरे लिए
बस तुम्हारा इतना कह देना ही काफी है ,मुझमें फिर से जान डालने को
तुम्हारे चन्द शब्दों को तरसती मैं तुम्हारे इंतज़ार में
जानती हूँ तुम आओगे जरूर कुछ विश्वास सा होता है खुद पर ही
फासले बनते हैं तो दूरियां भी मिटती जरूर हैं
बस अब वो दूरी मिटने का इंतज़ार
पल पल तुम्हें देखने को तरसती आँखें
कहीं यूँ ही इंतज़ार करते करते बंद न हो जाएँ प्रियतम, आ जाओ
अब तो आ जाओ ,तुम्हारी चाहत में बस यही गुहार
अब तो आ जाओ !!अब तो आ जाओ .........
_______________अंजना चौहान ____________________
Monday, 21 May 2012
बरसात का सुहाना मौसम
पवन मंद मंद मुस्काए
भावों को संग बहा ले जाए
कभी बहते हैं जल में गहरे तक
कभी बादलों के ऊपर उड़ जाएँ
निखत छुप रहे ओटन में बदली की
बदल रहे घुमड़ घुमड़ मुस्काए
बिजली कड़क रही है मानो
अपना प्यार बताती सी
बूंदे पद रही हैं रिमझिम सी
प्रेम सुधा बरसाती सी
प्रकृति का यह रूप मनोरम
मन को सबके हर लेता है
खिल जाते हैं फूल बगिया में मन की
ये मन चंचल कर देता है _______________अंजना चौहान
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