मेरे अहसास

Ahsaas

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Dil ki baatain

Monday, 21 May 2012


बरसात का सुहाना मौसम

पवन मंद मंद मुस्काए
भावों को संग बहा ले जाए
कभी बहते हैं जल में गहरे तक
कभी बादलों के ऊपर उड़ जाएँ
निखत छुप रहे ओटन में बदली की
बदल रहे घुमड़ घुमड़ मुस्काए
बिजली कड़क रही है मानो
अपना प्यार बताती सी
बूंदे पद रही हैं रिमझिम सी
प्रेम सुधा बरसाती सी
प्रकृति का यह रूप मनोरम
मन को सबके हर लेता है
खिल जाते हैं फूल बगिया में मन की
ये मन चंचल कर देता है _______________अंजना चौहान

5 comments:

  1. "barsaat ka suhaana mousam" bada sajeev or sunder drashy prastut kiya hai Anjana ji. Bahut khoob.

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  2. Bahoot sunder kavita achhe ahsaasoN ke saath...

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  3. दी उम्दा लिखा है आपने
    शव्दों से निखरता प्राकृतिक प्रेम
    पवन मंद मंद मुस्काए
    भावों को संग बहा ले जाए
    कभी बहते हैं जल में गहरे तक
    कभी बादलों के ऊपर उड़ जाएँ

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