बरसात का सुहाना मौसम
पवन मंद मंद मुस्काए
भावों को संग बहा ले जाए
कभी बहते हैं जल में गहरे तक
कभी बादलों के ऊपर उड़ जाएँ
निखत छुप रहे ओटन में बदली की
बदल रहे घुमड़ घुमड़ मुस्काए
बिजली कड़क रही है मानो
अपना प्यार बताती सी
बूंदे पद रही हैं रिमझिम सी
प्रेम सुधा बरसाती सी
प्रकृति का यह रूप मनोरम
मन को सबके हर लेता है
खिल जाते हैं फूल बगिया में मन की
ये मन चंचल कर देता है _______________अंजना चौहान

"barsaat ka suhaana mousam" bada sajeev or sunder drashy prastut kiya hai Anjana ji. Bahut khoob.
ReplyDeleteaabhaar aapka
DeleteBahoot sunder kavita achhe ahsaasoN ke saath...
ReplyDeletebahut bahut aabhaar
Deleteदी उम्दा लिखा है आपने
ReplyDeleteशव्दों से निखरता प्राकृतिक प्रेम
पवन मंद मंद मुस्काए
भावों को संग बहा ले जाए
कभी बहते हैं जल में गहरे तक
कभी बादलों के ऊपर उड़ जाएँ