मेरे अहसास

Ahsaas

Ahsaas
Dil ki baatain

Friday, 22 June 2012

समां रही वो 
जलतरंग सी क्यूँ 
अंतर्मन में 

खो जाऊं फिर 
सपन सलोने से
देख रही मैं

हाँ तुम्हीं लाये
जीवन में बहार
पहली बार

उपवन भी
खिल रहा सखी री
बरखा आई

मन के तार
मैं न खोलूं सखी री
तड़पन दे

दो दिल एक
होने को बेक़रार
हुए जाते हैं

प्यार किया है
दो दिल एक जान
हुए जाते हैं......

1 comment:

  1. वाह प्रस्तुतिकरण का सुन्दर अंदाज़
    पंक्तियां मन को प्रफुलित कर रही हैं

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