राम लखन
दशरथ नंदन
भटके वन
संग सीता माँ
जी कठिन जीवन
पत्नी धर्म है
ब्रह्मण भेष
धर रावन कियो
सीता हरण
हनुमान जी
चार सौ कोस उड़े
समुद्र पार
हनुमान जी
अशोक वाटिका को
दियो उजाड़
दियो लंका को
जलाय, ताकत दी
दिखाए वहां
मारे रावन
छुडाय सीता मैय्या
हुई जीत है ............
तेरे अहसास
ReplyDeleteपढ़कर झूमे मेरा मन
शब्दों की पिरोई ऐसी माला
मन हुआ जाये मतवाला
हर शब्द में गराई हैं हैं
खुदा ने तुझपर रहमत बरसाई हैं
neel ji aapka aabhaar
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