मेरे अहसास

Ahsaas

Ahsaas
Dil ki baatain

Sunday, 15 September 2013

नहीं अज्ञानी 
कैसे होगा पतन 
लाओ सुनामी 

Sunday, 23 September 2012


बोलती आँखें
दिल खोलती आँखें
कहती आँखें

हसीन आँखें
मतवाली आखियाँ
तिरछे नैन

चंचल नैन
करें दिल बैचैन
तडपाय जिया

तेरी ये आँखें
कहें दिल कि बात
क्यों है उदास

Saturday, 4 August 2012

सखी री तुझे 
क्यूँ लगा प्रेम रोग 
ये बड़ा बुरा 

दिल का रोग 
बावरी क्यूँ हुई तू 
करे बेहाल 

खो बैठेगी तू 
सुध बुध अपनी 
हुई बीमार 

देख रही है 
सपन सलोने से 
मन प्रसन्न 

ख्यालों में गुम
नयी नयी प्रीत है 
देखे दर्पण 

मीत से बंधी 
प्रीत की डोर अब 
मुस्काते पल 

Wednesday, 27 June 2012


कबूल नहीं 
आजादी में बेड़ियाँ 
लड़ी बहुत 

झांसी की रानी 
देश की खातिर ही 
हुई कुर्बान

कूदी मैदान 
ना पहनी चूड़ियाँ 
लड़ी जोश में 

लड़ी मर्दानी 
ले बर्छी तलवार 
आखिरी दम 

बहाया लहू 
वार्ता की मिसाल 
ऊँचा है नाम 

उसने किया 
न्योछावर जीवन
देकर प्राण 

बाँध पीठ वो 
मासूम को अपनी 
कूदी मैदान 

दगा दे गए 
अपने ही घर में 
जीतती कैसे 

लड़ी बहुत 
मतवाली थी मनु 
फ़िदा देश पे 

शान देश की 
मन में है सबके 
आज भी जिन्दा 

लक्ष्मी सरीखी 
देश का मान बढे 
पूजो कन्या को 













Friday, 22 June 2012

बगियन में 
नाचा मोर चुराए 
जिया हमरा 

दिल धड़का 
बरसात की बूँद
क्या कहे जाए

झूमा ख़ुशी से
जिया मोरा सनम
को हम भाये

बरसात का
मौसम है साँसों की
गर्मी बढाए

जवाँ दिलों की
नजदीकी तो अब
गहरा रिश्ता

आगोश समाँ
एक दूजे के फिर
बंधे बंधन ............
समां रही वो 
जलतरंग सी क्यूँ 
अंतर्मन में 

खो जाऊं फिर 
सपन सलोने से
देख रही मैं

हाँ तुम्हीं लाये
जीवन में बहार
पहली बार

उपवन भी
खिल रहा सखी री
बरखा आई

मन के तार
मैं न खोलूं सखी री
तड़पन दे

दो दिल एक
होने को बेक़रार
हुए जाते हैं

प्यार किया है
दो दिल एक जान
हुए जाते हैं......
बांसुरी बाजे 
कन्हाई राधा संग 
रास रचावे ......

गोकुल सूना 
बिन तेरे कन्हैय्या
आन बसों ना......


द्रोपदी लाज
द्वारकाधीश आये
बचाने चीर .........