मेरे अहसास: May 2012

Ahsaas

Ahsaas
Dil ki baatain

Saturday, 26 May 2012


तुम्हारे मेरे बीच क्यूँ ये दूरियां बढ़ रही ,बताओ  ?
ये शब्दों का झुरमुट बढाता फासला क्यूँ है ?
शब्दों की इस भीड़ में तुम मौन !! मैं क्या समझूँ ?
अपनों की इस भीड़ में बेगाने से तुम !! बेगाना कौन ?
मैं तुम्हें ,तुम्हारे इस रूप को क्या नाम दूँ ?
तुम्हारे मेरे बीच अब जब कैसी भी दीवार नहीं
फिर  भी तुम्हारी  बेरुखी !! मैं क्या समझूँ ?
भावनाओं का मायाजाल ,छलावा कुछ पलों का ,या मजबूरी नाम दे दूँ !!
तुम्हारा ये मौन, तुम्हारी ये चुप्पी ,तुम कुछ कहते क्यूँ नहीं?
किन्तु ये बहुत कुछ कह जाती है
जैसे टूट कर तारा गिरता है जमीं पर वैसे ही
मैं भी टूट कर बिखरने को मजबूर
बचा सकते हो तो थाम लो आकर
कह दो तुम मेरे हो सदा के लिए
तुम्हारा प्यार छलावा नहीं मेरे लिए
बस तुम्हारा इतना कह देना ही काफी है ,मुझमें फिर से जान डालने को
तुम्हारे चन्द शब्दों को तरसती मैं तुम्हारे इंतज़ार में
जानती हूँ तुम आओगे जरूर कुछ विश्वास सा होता है खुद पर ही
फासले बनते हैं तो दूरियां भी मिटती जरूर हैं
बस अब वो दूरी मिटने का इंतज़ार
पल पल तुम्हें देखने को तरसती आँखें
कहीं यूँ ही इंतज़ार करते करते बंद न हो जाएँ प्रियतम, आ जाओ
अब तो आ जाओ ,तुम्हारी चाहत में बस यही गुहार
अब तो आ जाओ !!अब तो आ जाओ .........

_______________अंजना चौहान ____________________

Monday, 21 May 2012


बरसात का सुहाना मौसम

पवन मंद मंद मुस्काए
भावों को संग बहा ले जाए
कभी बहते हैं जल में गहरे तक
कभी बादलों के ऊपर उड़ जाएँ
निखत छुप रहे ओटन में बदली की
बदल रहे घुमड़ घुमड़ मुस्काए
बिजली कड़क रही है मानो
अपना प्यार बताती सी
बूंदे पद रही हैं रिमझिम सी
प्रेम सुधा बरसाती सी
प्रकृति का यह रूप मनोरम
मन को सबके हर लेता है
खिल जाते हैं फूल बगिया में मन की
ये मन चंचल कर देता है _______________अंजना चौहान